VMOU Old Paper with answer ; VMOU HI-05 Paper BA Final Year , vmou history important question

VMOU HI-05 Paper BA Final Year ; vmou exam paper 2023

नमस्कार दोस्तों इस पोस्ट में VMOU BA Final Year के लिए इतिहास ( HI -05 contemporary India 1947-2000 AD ) का पेपर उत्तर सहित दे रखा हैं जो जो महत्वपूर्ण प्रश्न हैं जो परीक्षा में आएंगे उन सभी को शामिल किया गया है आगे इसमे पेपर के खंड वाइज़ प्रश्न दे रखे हैं जिस भी प्रश्नों का उत्तर देखना हैं उस पर Click करे –

Section-A

प्रश्न-1. भारत-चीन युद्ध कब लड़ा गया ? भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री कौन थे ?

उत्तर:-भारत-चीन युद्ध 1962 में लड़ा गया था। भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री उस समय जवाहरलाल नेहरू थे।

प्रश्न-2. निर्गुट आन्दोलन के बारे में आप क्या जानते हैं ?

उत्तर:- निर्गुट आंदोलन 1977 और 1981 के बीच महाराष्ट्र के गाँव निर्गुट में हुआ था। इसमें किसानों ने अपने भूमि हक की रक्षा के लिए संघर्ष किया और नेता नामदेव धंगरे के नेतृत्व में आंदोलन किया। उन्होंने समाज में जातिगत बेड़फूटी के खिलाफ भी आवाज उठाई। आंदोलन ने किसानों के हक की मांग को सामूहिक तौर पर उठाया और उनके सामाजिक संघर्ष को प्रकट किया।

प्रश्न-3. भारत में लौह पुरुष के नाम से कौन प्रसिद्ध है ?

उत्तर:- भारत में लौह पुरुष के नाम से वल्लभ भाई पटेल प्रसिद्ध हैं। उन्होंने सरदार वल्लभभाई पटेल के रूप में भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के समय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और भारतीय संघ के संस्थापक भी थे।

प्रश्न-4. 1972 ई. के शिमला समझौते के बारे में आप क्या जानते हैं ?

उत्तर:-1972 ई. के शिमला समझौते का उल्लेख भारत और पाकिस्तान के बीच हुए एक समझौते को करता है। यह समझौता बांगलादेश की मुक्ति के बाद हुआ था और इसका मुख्य उद्देश्य भारत-पाकिस्तान के बीच सीमा विवादों को सुलझाना था। समझौते के तहत दोनों देशों ने शिमला, हिमाचल प्रदेश में मुख्य कदम उठाए और शांति की स्थापना की गई। समझौता आपसी सीमा सुरक्षा के प्रतिबंधों को जारी रखते हुए, शांति संवाद के माध्यम से विवादों के समाधान को प्रोत्साहित किया।

प्रश्न-5. भारत में बैंकों का राष्ट्रीयकरण किस वर्ष किया गया ?

उत्तर:-भारत में बैंकों का राष्ट्रीयकरण 1969 वर्ष में किया गया था।

प्रश्न-6. स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भारत में गठित दो शिक्षा सुधार आयोगों के नाम बताइए ?

उत्तर:- राधाकृष्ण आयोग (1948-49), माध्यमिक शिक्षा आयोग (मुदालियर आयोग) 1953, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (1953), कोठारी शिक्षा आयोग (1964), राष्ट्रीय शिक्षा नीति (1968) एवं नवीन शिक्षा नीति (1986) आदि

प्रश्न-7. भारतीय संविधान के निर्माण में कितना समय लगा ?

उत्तर:-भारतीय संविधान को पूर्ण रूप से तैयार करने में 2 वर्ष, 11 माह, 18 दिन का समय लगा था।

प्रश्न-8. स्वतंत्र भारत में सर्वोच्च न्यायालय की स्थापना कब की गई ?

उत्तर:-भारत के सर्वोच्च न्यायालय की स्थापना 26 जनवरी 1950 को हुई थी। भारत का सर्वोच्च न्यायालय सर्वोच्च न्यायिक न्यायालय है।

प्रश्न-10. राष्ट्रीय एकीकरण में पटेल के योगदान पर संक्षिप्त लेख लिखिए ?

उत्तर:-

प्रश्न-11. पंचशील सिद्धान्त के विषय में आप क्या जानते हैं ?

उत्तर:- पंचशील सिद्धान्त एक अहम राजनीतिक और विदेश नीति का प्रतीक है, जिसे भारत और चीन ने साझा किया था। यह सिद्धान्त भारतीय प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू और चीनी प्रधानमंत्री चौ एन लाई के बीच समझौते के रूप में बनाया गया था और 1954 में प्रस्तुत किया गया था। पंचशील का अर्थ होता है “पांच सिद्धान्त” या “पांच नीतियाँ”। इसमें निम्नलिखित पांच सिद्धान्त शामिल थे:

  1. समावेशनात्मक सहमति (Mutual Respect)
  2. सहयोगात्मक संरचना (Mutual Cooperation)
  3. अपनायभाषा में संवाद (Respect for Each Other’s Territorial Integrity and Sovereignty)
  4. असमंजस एवं संघर्ष के बिना निरस्तरीकरण (Non-Interference in Each Other’s Internal Affairs
  5. शांति सचिवालय और विवाद समाधान (Peaceful Coexistence)
प्रश्न-12. सार्क (दक्षेस) का मुख्यालय कहाँ है ?

उत्तर:-सार्क (दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन) का मुख्यालय काठमांडू, नेपाल में स्थित है।

प्रश्न-13. हरित क्रान्ति का जनक कौन था ?

उत्तर:-विश्व में नॉरमन बोरलॉग हरित क्रांति के प्रवर्तक माने जाते हैं लेकिन भारत में हरित क्रांति लाने का श्रेय सी सुब्रमण्यम को जाता है.

प्रश्न-14. वैश्वीकरण पर लेख लिखिए ?

उत्तर:- वैश्वीकरण एक प्रक्रिया है जिसमें दुनिया के विभिन्न क्षेत्रों में व्यापार, सांस्कृतिक प्रथाएँ, तकनीकी उन्नति, संचार, और अन्य क्षेत्रों में सहयोग की प्रक्रिया का मतलब होता है। यह एक गहरा परिवर्तनात्मक प्रक्रिया है जो दुनिया भर के लोगों के बीच गहरे संबंध बनाने और साझा करने की स्थापना करती है। वैश्वीकरण का मुख्य उद्देश्य विभिन्न देशों के लोगों के बीच विशेष आर्थिक, सांस्कृतिक और तकनीकी संबंध बनाना है जिससे सामाजिक और आर्थिक सहयोग में वृद्धि हो।

प्रश्न-15. बैंकों के राष्ट्रीयकरण की विवेचना कीजिए ?

उत्तर:-देश के प्रमुख चौदह बैंकों का राष्ट्रीयकरण 19 जुलाई सन् 1969 ई. को किया गया। ये सभी वाणिज्यिक बैंक थे। इसी तरह 15 अप्रैल सन 1980 को निजी क्षेत्र के छ: और बैंक राष्ट्रीयकृत किये गये। भारत में बैंकों के राष्ट्रीयकरण का एक महत्वपूर्ण और उत्कृष्ट चरण है, जिसने आर्थिक संरचना को मजबूती और सुरक्षा के साथ नये दिशानिर्देश दिए हैं।

प्रश्न-16. भारतीय संविधान की दो विशेषताएँ बताइए ?

उत्तर:-

  1. सबसे लंबा लिखित संविधान
  2. कठोरता और लचीलेपन का मिश्रण
  3. विभिन्न स्रोतों से लिया गया संविधान
  4. संघात्मकता और एकात्मकता का मिश्रण
  5. सरकार का संसदीय स्वरूप
  6. कानून का शासन
  7. संसदीय संप्रभुता और न्यायिक सर्वोच्चता
  8. एकीकृत और स्वतंत्र न्यायपालिका
  9. संविधान संशोधन प्रक्रिया
  10. धर्मनिरपेक्षता और सामाजिक न्याय
प्रश्न-17. गुटनिरपेक्ष नीति को परिभाषित कीजिए

उत्तर:- गुटनिरपेक्ष नीति एक ऐसी राजनीतिक या विदेश नीति की प्रक्रिया को दर्शाती है जिसमें कोई देश अपने आप को किसी विशिष्ट गुट (या गठबंधन) के साथ जोड़ने या सहयोग देने की नीति अपनाता है, बिना दूसरे गुटों को प्रभावित किए बिना। इसका मतलब होता है कि विदेश नीति के क्षेत्र में, देश एक गुट या गठबंधन के साथ मिलकर या सहयोग करके अपने हितों की प्राथमिकता देता है, जिससे उसके स्वायत्तता, सुरक्षा और आर्थिक दृष्टिकोण सुरक्षित रह सकें। इस प्रकार की नीति में, देश अपने आप को किसी एक गुट के साथ संबंधित करता है

प्रश्न-18. प्रथम पंचवर्षीय योजना कब लागू हुई ?

उत्तर:-प्रथम भारतीय प्रधान मंत्री, जवाहरलाल नेहरू ने भारत की संसद को पहली पंचवर्षीय योजना प्रस्तुत की और इस पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता थी। पहली पंचवर्षीय योजना 1951 में शुरू की गई थी

प्रश्न-19. सत्यशोधक सभा का संस्थापक कौन था ?

उत्तर:-सत्यशोधक समाज के संस्थापक ज्योतिराव फुले थे, सत्यशोधक समाज (सत्य-शोध समाज) 24 सितंबर 1873 को स्थापना की गई

प्रश्न-20. भारत में कश्मीर के विलय के समय वहाँ के महाराजा कौन थे ?

उत्तर:-महाराजा हरि सिंह ने जम्मू-कश्मीर के भारत में विलय की घोषणा की है। महाराजा हरि सिंह के कश्मीर के भारत में विलय के लिए 26 अक्टूबर 1947 को साइन किया गया लेटर।

प्रश्न-21. भारतीय संविधान की धारा 370 के बारे में आप क्या जानते हैं ?

उत्तर:-धारा 370 के प्रावधानों के अनुसार, संसद को जम्मू-कश्मीर के बारे में रक्षा, विदेश मामले और संचार के विषय में कानून बनाने का अधिकार है लेकिन किसी अन्य विषय से सम्बन्धित क़ानून को लागू करवाने के लिये केन्द्र को राज्य सरकार का अनुमोदन चाहिए।

प्रश्न-22. भू जोतों की चकबंदी से आप क्या समझते हैं ?

उत्तर:-जोतों की चकबंदी का अर्थ हैं कृषकों के बिखरे हुए खेतों को एक बड़े आकार के खेत (चक) का रूप देने से होता है। शाही कृषि आयोग (Royal Commission on Agriculture) का मत है कि “चकबंदी का अर्थ भूमि के कई बिखरे हुए खेतों को एक बड़े क्षेत्र में परिणित करना होता है।”

प्रश्न-23. सीटो को स्पष्ट कीजिए ?

उत्तर:-दक्षिण पूर्व एशिया संधि संगठन (SEATO) एक दक्षिण पूर्व एशिया में क्षेत्रीय-रक्षा संगठन था। 8 सितंबर, 1954 को आस्ट्रेलिया की अध्यक्षता में मनीला में फ्रांस ,न्यूजीलैंड ,पाकिस्तान ,फिलीपींस ,थाईलैंड ,यूनाइटेड किंगडम , और संयुक्त राज्य अमेरिका ने संधि पर हस्ताक्षर किए वो संधि 19 फरवरी, 1955 को लागू हुई।

प्रश्न-24.

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प्रश्न-30.

उत्तर:-

Section-B

प्रश्न-1. स्वतंत्र भारत में औद्योगिक विकास पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए ?

उत्तर:-स्वतंत्र भारत में औद्योगिक विकास ने देश के आर्थिक प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान दिया। इस युग में, भारतीय सरकार ने उद्योगों की प्रोत्साहना और विकास के लिए नीतियाँ बनाई। विशेष रूप से द्वितीय योजना (1956-1961) के दौरान, औद्योगिकीकरण को महत्वपूर्ण मंशा दिया गया था। उद्योगों के क्षेत्र में निवेश बढ़ाने और तकनीकी उन्नति को प्रोत्साहित करने के लिए विभिन्न कदम उठाए गए। इसके परिणामस्वरूप, उद्योगों का विस्तार हुआ, नौकरियों की संख्या में वृद्धि हुई, और देश की आर्थिक स्थिति में सुधार आया।

प्रश्न-2. भारतीय संविधान की प्रमुख विशेषताओं की विवेचना कीजिए ?

उत्तर:-भारतीय संविधान एक ऐतिहासिक दस्तावेज है जो भारत के संविधानिक ढांचे को परिभाषित करता है और देश के नागरिकों के मौलिक अधिकार और कर्तव्यों को सुरक्षित करने का कार्य करता है। इसमें कई प्रमुख विशेषताएँ हैं, जो निम्नलिखित हैं

  1. सबसे लंबा लिखित संविधान
  2. कठोरता और लचीलेपन का मिश्रण
  3. विभिन्न स्रोतों से लिया गया संविधान
  4. संघात्मकता और एकात्मकता का मिश्रण
  5. सरकार का संसदीय स्वरूप
  6. कानून का शासन
  7. संसदीय संप्रभुता और न्यायिक सर्वोच्चता
  8. एकीकृत और स्वतंत्र न्यायपालिका
  9. संविधान संशोधन प्रक्रिया
  10. धर्मनिरपेक्षता और सामाजिक न्याय
प्रश्न-3. भारत की विदेश नीति की मुख्य विशेषताओं का वर्णन कीजिए ?

उत्तर:- भारत की विदेश नीति के कई मुख्य विशेषताएँ हैं, जो देश की अंतरराष्ट्रीय संबंधों को निर्माणबद्ध और सामर्थ्यपूर्ण बनाने का उद्देश्य रखती है। निम्नलिखित हैं कुछ महत्वपूर्ण विशेषताएँ:

  1. शांति और सुरक्षा: भारत की विदेश नीति का पहला लक्ष्य शांति और सुरक्षा की स्थापना है। देश अपने पड़ोसी देशों के साथ मित्रता और सहयोग की दिशा में काम करता है और क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा में भी योगदान करता है।
  2. सामर्थ्यपूर्ण दिप्लोमेसी: भारत अपनी विदेश नीति में सामर्थ्यपूर्ण दिप्लोमेसी का प्रतिष्ठान करता है, जिससे विभिन्न देशों के साथ समझौते और सहयोग की दिशा में कदम उठाए जा सकें।
  3. विश्वस्तरीय मुद्दों में सहयोग: भारत अंतरराष्ट्रीय मुद्दों में सहयोग करने के लिए प्रतिबद्ध है, जैसे कि विकास, जलवायु परिवर्तन, आतंकवाद आदि।
  4. सांस्कृतिक डिप्लोमेसी: भारत अपनी सांस्कृतिक धरोहर को प्रमोट करने के लिए भी कई कदम उठाता है, जैसे कि साहित्य, कला, भाषा आदि के माध्यम से विश्व में भारतीय संस्कृति को प्रस्तुत करना।
  5. सामर्थ्यपूर्ण अर्थव्यवस्था: भारत विदेश नीति में अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में भी सामर्थ्यपूर्ण बनने का प्रयास करता है, ताकि विश्व अर्थतंत्र में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका हो सके।
  6. न्यायपूर्ण और असमानता के खिलाफ: भारत की विदेश नीति न्यायपूर्णता, समानता, और असमानता के खिलाफ है, और उसका प्रयास होता है कि विश्व भर में सभी देशों के लिए विकास का मार्ग उपलब्ध हो।

इन मुख्य विशेषताओं के माध्यम से, भारत की विदेश नीति उदार, सामर्थ्यपूर्ण, और सामंजस्यपूर्ण दृष्टिकोण का परिप्रेक्ष्य बनाती है जो देश के संबंधों को बढ़ावा देता है।

प्रश्न-4. भारत की मिश्रित अर्थव्यवस्था पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए ?

उत्तर:- भारत की मिश्रित अर्थव्यवस्था एक ऐसी अर्थव्यवस्था है जो ग्रामीण और नगरीय क्षेत्रों के संयोजन को प्रमोट करती है। यह अर्थव्यवस्था अन्य शब्दों में “द्वैधशील अर्थव्यवस्था” के रूप में जानी जाती है।

भारत की मिश्रित अर्थव्यवस्था में कृषि, उद्योग, और सेवाएं समाहित होती हैं। कृषि उद्योगीकरण के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों की आर्थिक विकास को भी महत्वपूर्ण मानती है। इसके साथ ही, नगरीय क्षेत्रों में उद्यमिता और तकनीकी उन्नति को बढ़ावा देती है।

भारत की मिश्रित अर्थव्यवस्था में निजी और सार्वजनिक क्षेत्र निजी क्षेत्र सेवाओं, उद्योग और कृषि जैसे उद्योगों पर प्रभाव डालता है और राष्ट्र के विकास के लिए आवश्यक रहा है.

भारत की मिश्रित अर्थव्यवस्था में उद्यमिता, नौकरियां, और आय विभाजन के बारे में भी सोचा जाता है। यह दर्शाती है कि न केवल विकसित नगरीय क्षेत्रों में बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी उद्यमिता का प्रोत्साहन होना आवश्यक है।

इस प्रकार, भारत की मिश्रित अर्थव्यवस्था उद्यमिता, समानता, और सुरक्षा के सिद्धांतों के आधार पर अपने संबंधों को संतुलित और सहयोगपूर्ण बनाने का प्रयास करती है।

प्रश्न-5. भारत में बैंकों के राष्ट्रीयकरण पर एक निबन्ध लिखिए ?

उत्तर:- प्राचीनकाल से लेकर आधुनिक युग तक, बैंक एक महत्वपूर्ण आर्थिक संस्था होती आई है, जो समाज की आर्थिक व्यवस्था को सुनिश्चित करने और समृद्धि को प्रोत्साहित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। भारत में बैंकों के राष्ट्रीयकरण का एक महत्वपूर्ण और उत्कृष्ट चरण है, जिसने आर्थिक संरचना को मजबूती और सुरक्षा के साथ नये दिशानिर्देश दिए हैं।

इतिहास: भारत में बैंकों का राष्ट्रीयकरण 1969 में हुआ था, जब इंदिरा गांधी की नेतृत्व में केंद्र सरकार ने 14 बड़े और महत्वपूर्ण निजी बैंकों को नेशनलाइज किया। यह कदम उन समय के आर्थिक परिस्थितियों के संदर्भ में लिया गया था जब बैंकों का सार्वजनिक सेक्टर में अधिकतम भूमिका था और निजी सेक्टर का संकट था।

लाभ: बैंकों के राष्ट्रीयकरण के परिणामस्वरूप, बैंकों की सेवाएं आम जनता के लिए उपलब्ध हो गई और आर्थिक समानता में सुधार हुआ। गरीबी रेखा के पार के लोगों को भी बैंकों के साथ जुड़ने का अवसर मिला और उन्हें वित्तीय समर्थन की सुविधा मिली। राष्ट्रीयकरण से बैंकों का वित्तीय स्थायिता भी मजबूत हुआ, जिससे वित्तीय व्यवस्था में सुरक्षा बढ़ी।

चुनौतियाँ: हालांकि बैंकों के राष्ट्रीयकरण ने कई सकारात्मक परिणाम दिए, लेकिन कुछ चुनौतियों का सामना भी हुआ है। नए प्रौद्योगिकी और डिजिटलीकरण के युग में, सरकारी बैंकों को तबादले की आवश्यकता है ताकि वे निजी बैंकों के साथ मुकाबले में मजबूत रह सकें।

निष्कर्ष: भारत में बैंकों के राष्ट्रीयकरण ने सामाजिक न्याय और आर्थिक विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। यह साबित करता है कि सरकार की सक्रिय भूमिका से आर्थिक समरसता की प्राप्ति संभव है, और यह आर्थिक स्थिति में सुधार करने के लिए निवेश और सुविधाएं प्रदान कर सकता है।

प्रश्न-6. स्वतंत्र भारत में यातायात के साधनों के विकास पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए ?

उत्तर:- स्वतंत्र भारत में यातायात के साधनों का विकास एक महत्वपूर्ण पहलू था, जिसने देश की समृद्धि, समरसता और विकास की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान किया। यातायात के साधनों के विकास ने लोगों के जीवन को सुविधाजनक और उत्तरदायित्वपूर्ण बनाया है। प्रारंभ में, विशेष रूप से रेलवे सेवा ने देश के विभिन्न हिस्सों को जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। रेलवे के नेटवर्क का विस्तार होने से लोगों को सामाजिक और आर्थिक रूप से आसानी हुई और व्यापार और व्यवसाय में वृद्धि हुई।

विमान, सड़क और जलयातायात के क्षेत्र में भी विकास हुआ। सड़कों का नेटवर्क विकसित किया गया और यातायात को सुरक्षित और आसान बनाने के लिए मानकों का पालन किया गया। विमान यातायात के क्षेत्र में भी विकास हुआ और लोगों को विभिन्न क्षेत्रों में तेजी से यात्रा करने का अवसर मिला। जलयातायात के क्षेत्र में भी नाविक सेवाओं का विकास हुआ, जिससे नगरों को समृद्धि के साथ-साथ नौकरियों का भी स्रोत मिला। यातायात के साधनों के विकास से न केवल आर्थिक विकास हुआ, बल्कि विभिन्न क्षेत्रों में सामाजिक समरसता और समानता को भी सुधारा। लोगों को विभिन्न क्षेत्रों में अधिक संवाद स्थलों का अवसर मिला और विभिन्न संस्कृतियों के बीच भी संवाद और विशेषता को बढ़ावा मिला।

इस प्रकार, स्वतंत्र भारत में यातायात के साधनों के विकास ने देश की सामाजिक और आर्थिक प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान किया, जिससे लोगों के जीवन को सुविधाजनक और बेहतर बनाया।

प्रश्न-7. भारत के प्रमुख राजनैतिक दलों का वर्णन कीजिए ?

उत्तर:- भारत में कई प्रमुख राजनैतिक दल हैं, जिनका राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव देश के राजनीतिक परिदृश्य को मोल देता है। यहां कुछ प्रमुख राजनैतिक दलों की संक्षिप्त जानकारी दी गई है:

  1. भारतीय जनता पार्टी (भा.ज.पा): भारतीय जनता पार्टी, जिसे भा.ज.पा के रूप में भी जाना जाता है, भारत की सबसे बड़ी दल है और वर्तमान में राष्ट्रीय सत्ता में है। यह दल हिन्दू नेशनलिस्ट आदर्शों पर आधारित है और भारतीय राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
  2. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस): भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस, जिसे केंद्रीय कांग्रेस के नाम से भी जाना जाता है, भारतीय राजनीति की पुरानी और प्रमुख दलों में से एक है। यह दल गणराज्य, सेक्युलरिज्म, और सामाजिक न्याय के मूल सिद्धांतों पर आधारित है।
  3. आम आदम पार्टी (आप): आम आदम पार्टी एक नई उभरती हुई दल है जो राष्ट्रीय स्तर पर भी महत्वपूर्ण बन गई है। इसका मुख्य आदर्श लोकतंत्र, आपसी सहमति, और आम आदम के हितों के प्रति समर्पण पर आधारित है।
  4. बसपा (बहुजन समाज पार्टी): बसपा जाति और जातिवाद के खिलाफ उठी आवाज को दर्शाती है, और इसका मुख्य लक्ष्य वर्गानुसार समानता की स्थापना है।
  5. शिवसेना: शिवसेना मुख्य रूप से महाराष्ट्र राज्य में कार्यरत है और मराठा साम्राज्य के आदर्शों पर आधारित है।
  6. तृणमूल कांग्रेस: तृणमूल कांग्रेस के आदर्श मूलभूत समाजिक न्याय और पारंपरिक संस्कृति के प्रति समर्पण पर आधारित है। यह पश्चिम बंगाल में सक्रिय है।
प्रश्न-8. स्वतंत्र भारत में हरित क्रान्ति के प्रभावों की विवेचना कीजिए ?

उत्तर:- स्वतंत्र भारत में हरित क्रांति ने देश की कृषि और खाद्य सुरक्षा को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित किया। इस क्रांति का उद्देश्य था कि खेती को विज्ञानिक तरीकों से सुधारकर किसानों की आय और जीवनस्तर में वृद्धि की जाए, ताकि उन्हें विशेष रूप से आर्थिक संकटों से निकलने का माध्यम मिल सके।

प्रमुख प्रभाव:

  1. खेती में तकनीकी उन्नति: हरित क्रांति के प्रभाव से कृषि में तकनीकी उन्नति हुई। नई खेती तकनीकों, उच्च जैविक खेती और खेती की वैज्ञानिक माध्यमों से खेती में उत्तम उत्पादन होने लगा।
  2. उन्नत बीजों का प्रयोग: हरित क्रांति ने उन्नत बीजों का प्रयोग किया जो ज्यादा उत्पादन देने वाले थे। इससे फसलों की मात्रा में वृद्धि हुई और खाद्य सुरक्षा में सुधार हुआ।
  3. उच्च उत्पादकता: हरित क्रांति के प्रभाव से कृषि उत्पादकता में वृद्धि हुई, जिससे खाद्य आपूर्ति में सुधार हुआ और भारत ने आत्मनिर्भरता में सुधार किया।
  4. विभाजित और जल रक्षण: हरित क्रांति ने जल संसाधनों के सही प्रबंधन के महत्व को समझाया। यह कृषि में सिंचाई तंत्रों का प्रयोग बढ़ाने और जल संवर्धन की दिशा में कदम उठाने का माध्यम बना।
  5. किसानों की आय में वृद्धि: हरित क्रांति के प्रभाव से किसानों की आय में वृद्धि हुई। उन्हें नए तकनीकी तरीकों के ज्ञान का माध्यम मिला जिससे उनका उत्पादन बढ़ा और व्यापारिक मूल्य में वृद्धि हुई।
  6. कृषि सेक्टर में रोजगार: हरित क्रांति के प्रभाव से कृषि सेक्टर में रोजगार की स्थिति में सुधार हुआ। नए तकनीकी और उत्पादन के कारण कृषि सेक्टर में रोजगार की सम्भावनाएं बढ़ी।

इस प्रकार, हरित क्रांति ने देश की कृषि और खाद्य सुरक्षा में महत्वपूर्ण योगदान किया, जिससे लोगों की आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ और देश ने आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम उठाया।

प्रश्न-9. महिलाओं की स्थिति को रेखांकित कीजिए ?

उत्तर:-

प्रश्न-10. भारतीय संविधान के निर्माण में अम्बेडकर की भूमिका पर एक संक्षिप्त लेख लिखिए ?

उत्तर:- डॉ. भीमराव अंबेडकर की भूमिका भारतीय संविधान के निर्माण में अत्यधिक महत्वपूर्ण और गरिमामयी है। उन्होंने भारतीय समाज की सामाजिक और आर्थिक असमानता को दूर करने, विभिन्न जातियों और समुदायों के बीच समानता को स्थापित करने और समाज में न्याय की प्राप्ति के लिए संविधान की रचना की। उनका संविधान निर्माण में योगदान व्यक्तिगत और राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट माना जाता है।

अंबेडकर जी ने भारतीय संविधान की तैयारी के दौरान एक समर्पित, उत्कृष्ट और निष्ठावान दृष्टिकोण दिखाया। उन्होंने अपनी विशेषज्ञता और शिक्षा का उपयोग करके भारतीय समाज की समस्याओं के समाधान के लिए संविधान की निर्माण कार्य में अपने विचारों को अंकित किया।

बाबा साहब का योगदान सिर्फ संविधान निर्माण में ही सीमित नहीं था, बल्कि उन्होंने अपने जीवन में दिखाया कि वे दलित समुदाय के अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष करने के भी उत्कृष्ट महान परिचय थे। उन्होंने दलितों के प्रति सामाजिक और आर्थिक असमानता के खिलाफ आवाज उठाई और उनके अधिकारों की रक्षा की।

डॉ. अंबेडकर के द्वारा संविधान की रचना में उनके न्यायप्रिय, समाजसेवी और मानवाधिकारों के प्रति समर्पित दृष्टिकोण ने एक नया भारत की नींव रखी। उनका योगदान हमारे समाज में समानता, न्याय और विकास के मार्ग को प्रशस्त किया है और उन्हें ‘संविधान द्रष्टा’ के रूप में सम्मानित किया जाता है।

प्रश्न-11. स्वतंत्रता के बाद भारतीय-चीन सम्बन्धों का मूल्यांकन कीजिए ?

उत्तर:- स्वतंत्रता के बाद भारतीय-चीन सम्बंधों का मूल्यांकन एक विशेष परिप्रेक्ष्य में किया जा सकता है। इस दौरान भारत और चीन के बीच सम्बंधों में उतार-चढ़ाव रहे हैं, जिनका प्रभाव भारतीय गिनती के कई क्षेत्रों पर हुआ है। जिसका सकारात्मक और नकारात्मक पहलू निम्न प्रकार से हैं

सकारात्मक पहलु:

  1. व्यापार और आर्थिक सहयोग: स्वतंत्रता के बाद, भारत और चीन के बीच व्यापार और आर्थिक सहयोग में वृद्धि हुई है। दोनों देश एक-दूसरे के बड़े व्यापारी साथी बने हैं और विभिन्न क्षेत्रों में आर्थिक मिलान हो रहा है।
  2. विशेषज्ञता और वैज्ञानिक सहयोग: विज्ञान, प्रौद्योगिकी और विभिन्न शैक्षिक क्षेत्रों में भारत और चीन के बीच विशेषज्ञता और सहयोग की वृद्धि हुई है। दोनों देश एक-दूसरे से तकनीकी ज्ञान और अनुभव साझा कर रहे हैं।
  3. विश्व स्तर पर सहयोग: विश्व स्तर पर, भारत और चीन एक साथियों रूप में काम कर रहे हैं ताकि वे विभिन्न ग्लोबल मुद्दों का समाधान कर सकें।

नकारात्मक या असकारात्मक पहलु:

  1. सीमा विवाद: भारत और चीन के बीच कई सीमा विवाद हुए हैं, जिनमें दोनों देशों के बीच तनाव देखा गया है। इन सीमा विवादों ने सम्बंधों में तनाव को बढ़ावा दिया है।
  2. भूगोलिक और रणनीतिक दृष्टिकोण से विभाजन: भूगोलिक और रणनीतिक दृष्टिकोण से दोनों देशों के बीच विभाजन देखने को मिलता है, जो कि बार-बार समय-समय पर मतभेदों का कारण बनता है।
  3. विविधता और विचारधारा: भारत और चीन के समर्थन में विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों पर अक्सर विचारधाराओं में विभाजन देखने को मिलता है।
प्रश्न-12. कृषि सुधारों पर एक लेख लिखिए ?

उत्तर:- कृषि सुधार एक महत्वपूर्ण विषय है जो हमारे देश की आर्थिक वृद्धि और जनसंख्या की वृद्धि के साथ-साथ खाद्य सुरक्षा को भी सुनिश्चित करने में मदद करता है। कृषि सुधार का मतलब है कि हमें कृषि के क्षेत्र में तकनीकी, वैज्ञानिक और प्रबंधन द्वारा उन्नति लाने के लिए कदम उठाने चाहिए। यह न केवल खेतों की उत्पादकता बढ़ाता है, बल्कि किसानों की आय और जीवनस्तर को भी सुधारता है।

कृषि सुधार के क्षेत्रों में कई उपाय हो सकते हैं: जिसमे प्रमुख निम्न प्रकार हैं –

  • 1. बीज प्रौद्योगिकी: उन्नत बीज प्रौद्योगिकी के द्वारा किसानों को उन्नत और उच्च उत्पादकता वाले बीज उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा सकता है।
  • 2. खेती में तकनीकी उन्नति: नवाचारी खेती तकनीकों का प्रयोग करके उत्पादन में वृद्धि की जा सकती है, जैसे कि सिंचाई तकनीक, खाद और कीटनाशकों का सही प्रयोग करना।
  • 3. जलवायु परिवर्तन से संबंधित समस्याओं का समाधान: जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न होने वाली समस्याओं का समाधान खेती में नवाचारी तकनीकों के माध्यम से किया जा सकता है, जैसे कि सूखा प्रबंधन, अधिक उत्पादन के लिए अनुकूलित बुआई के प्रयास।
  • 4. किसानों की प्रशिक्षण और शिक्षा: किसानों को नवाचारी तकनीकों के बारे में प्रशिक्षित करने के लिए प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किए जा सकते हैं, ताकि वे उन्नत तरीकों से खेती कर सकें।
  • 5. खेती की सहायता के लिए तकनीकी प्लेटफ़ॉर्म: आजकल तकनीकी प्लेटफ़ॉर्म जैसे कि एप्लिकेशन्स के माध्यम से किसानों को खेती से संबंधित सहायता और जानकारी मिल सकती है, जैसे कि मौसम की जानकारी, कीट प्रबंधन, बाजार की जानकारी आदि।
प्रश्न-13. व्यापार तथा वाणिज्य के क्षेत्र में भारत की उपलब्धियों के विषय में लिखिए ?

उत्तर:- व्यापार और वाणिज्य के क्षेत्र में भारत ने विशेषत: अपने आधुनिक और परंपरागत उपायों के माध्यम से कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां प्राप्त की है। यह उपलब्धियां उनकी आर्थिक वृद्धि, ग्राहकों की सेवा, विपणन, नौकरियों की सृजनात्मकता और भारतीय आर्थिक उदारता की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

1. आधुनिक अवसरों की सृजनात्मकता: व्यापार और वाणिज्य के क्षेत्र में भारत ने आधुनिक और नवाचारी अवसरों की सृजनात्मकता के माध्यम से आर्थिक विकास की दिशा में कदम उठाए हैं। डिजिटल व्यापार, ई-कॉमर्स, ऑनलाइन पेमेंट और डिजिटल मार्केटिंग जैसे उपाय ने नए विपणन अवसर प्रदान किए हैं और छोटे व्यवसायों को भी आर्थिक समृद्धि की दिशा में मदद की है।

2. व्यापारिक संबंधों में सुधार: भारत ने अपने व्यापारिक संबंधों में सुधार करके विश्व बाजार में अपनी पहचान बनाई है। विभिन्न अंतरराष्ट्रीय समझौतों, मुफ्त व्यापार समझौतों और विभिन्न देशों के साथ मुख्यत: वित्तीय और आर्थिक सहयोग के माध्यम से भारतीय व्यापारिक संबंधों में सुधार किया गया है।

3. नौकरियों की बढ़ती संभावनाएं: व्यापार और वाणिज्य के क्षेत्र में उन्नति से नौकरियों की संभावनाएं भी बढ़ रही हैं। नए व्यवसाय उपायों, ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्मों, विपणन अवसरों और ई-कॉमर्स सेक्टर में नौकरियाँ प्राप्त करने का अवसर बढ़ गया है।

4. उत्पादों की विशेषज्ञता: भारत ने कई उत्पादों की विशेषज्ञता दिखाई है, जैसे कि फार्मास्यूटिकल्स, खाद्य प्रसंस्करण, नैनो-तकनीकी, टेक्सटाइल्स आदि। इससे उन्नत और उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादों की प्रयाप्तता होती है, जिन्हें अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बेचा जा सकता है।

5. बाजार की विस्तार संभावनाएं: भारत ने अपनी विशेष प्राकृतिक संसाधनों, बुद्धिमता, और विशेषज्ञता के साथ विश्व बाजारों में बढ़ते हुए अपने स्थान को मजबूत बनाया है। व्यापारिक संबंधों में नये संबंध और विकासशील बाजारों में प्रवेश के माध्यम से भारत के लिए विस्तार संभावनाएं हैं।

इन सभी प्रमुख उपलब्धियों के साथ, व्यापार और वाणिज्य के क्षेत्र में भारत का उद्यमशील योगदान आर्थिक स्थिति को मजबूत कर रहा है और देश को ग्लोबल व्यापार में महत्वपूर्ण भूमिका दे रहा है।

प्रश्न-14.विज्ञान तथा तकनीकी क्षेत्र में भारत की क्या उपलब्धियाँ हैं ?

उत्तर:- विज्ञान और तकनीकी क्षेत्र में भारत ने कई महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ प्राप्त की है, जिनसे देश के विकास और प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान किया जा रहा है। यहां कुछ महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ दी गई हैं:

1. स्पेस और आईएसरो: भारत ने अपने स्पेस प्रोग्राम के माध्यम से विश्व में अपनी पहचान बनाई है। चंद्रयान, मंगलयान, गगनयान जैसे स्पेस मिशनों ने दुनिया में भारत की तकनीकी और विज्ञान क्षमता को प्रमोट किया है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (आईएसरो) के प्रयासों से भारत ने अंतरिक्ष के क्षेत्र में उच्च स्तरीय साफल्य प्राप्त किए हैं।

2. आयुर्वेदिक ग्रंथों की तकनीकी विश्लेषण: भारतीय वैज्ञानिकों ने आयुर्वेदिक ग्रंथों की विश्लेषण और तकनीकी समझाने का प्रयास किया है। इससे भारतीय परंपरागत चिकित्सा पद्धतियों को आधुनिक तकनीकी दृष्टिकोण से समझने में मदद मिली है और उनकी महत्वपूर्णता को पुनः साबित किया है।

3. इंफॉर्मेशन तकनीकी: भारत ने इंफॉर्मेशन तकनीकी क्षेत्र में भी अपनी पहचान बनाई है। आधुनिक कम्प्यूटिंग, सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट, डिजिटल मार्केटिंग आदि के क्षेत्र में भारतीय कम्पनियाँ बड़े प्रसार में हैं।

4. नैनो-तकनीकी: नैनो-तकनीकी क्षेत्र में भारत ने भी महत्वपूर्ण योगदान किया है। इसमें भारत के वैज्ञानिकों ने अत्यंत छोटे स्तर पर तकनीकी विकास किया है, जिससे नए उत्पादों और प्रक्रियाओं की विकास की संभावना है।

5. आईटी सेक्टर: भारत ने आईटी सेक्टर में भी महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ हासिल की है।

प्रश्न-15. शैक्षणिक उपलब्धियों की विवेचना कीजिए ?

उत्तर:-

प्रश्न-16.श्रमिक संघों के विषय में आप क्या जानते हैं ?

उत्तर:-

प्रश्न-17. भारतीय संविधान के नीति निर्देशक तत्त्वों की व्याख्या कीजिए ?

उत्तर:-

प्रश्न-18. स्वतंत्रता के बाद भारत में कृषि सुधारों पर टिप्पणी लिखिए ?

उत्तर:-

प्रश्न-19. मत्स्य संघ के गठन को रेखांकित कीजिए ?

उत्तर:-

प्रश्न-20. भारत में रेल्वे के विकास पर टिप्पणी लिखिए ?

उत्तर:-

प्रश्न-21. स्वतंत्रता के पश्चात् भारत में प्रमुख श्रमिक संगठनों की जानकारी दीजिये ?

उत्तर:-

प्रश्न-22. चुनाव आयोग के प्रमुख कार्यों का वर्णन करिए ?

उत्तर:-

प्रश्न- 23. स्वतंत्र भारत में किसानों की मुख्य समस्या बताइए ?

उत्तर:-

प्रश्न-24. भारतीय संविधान के संशोधन की प्रक्रिया को समझाइए ?

उत्तर:-

Section-C

प्रश्न-1. भारतीय संविधान की प्रमुख विशेषताएं बताइये ?

उत्तर:- भारतीय संविधान एक ऐतिहासिक दस्तावेज है जो देश की शासन और संगठन की मूल नींव है। इसमें कई प्रमुख विशेषताएं हैं जो भारतीय डैमोक्रेसी और न्यायपूर्ण संरचना को प्रकट करती हैं।

1. समानता और समाजिक न्याय: संविधान ने समानता का मानवाधिकार मानक किया है और समाज में विभिन्न वर्गों के बीच समाजिक और आर्थिक समानता को प्रोत्साहित किया है। आरक्षित वर्गों के लिए आरक्षित आरक्षण प्रावधान भी अनुच्छेद 15(4) के तहत दिया गया है।

2. न्यायपालिका की स्वतंत्रता: संविधान ने न्यायपालिका को स्वतंत्र और निष्पक्ष बनाया है। यह न्यायपालिका को व्यक्तिगत और सामाजिक न्याय की सुनिश्चितता प्रदान करता है।

3. मौलिक अधिकार: संविधान ने मौलिक अधिकारों को व्यक्तिगत और सामाजिक मानक के रूप में मान्यता दी है। इसमें धर्म, भाषा, जाति, लिंग और समर्थन आदि के आधार पर किए गए भेदभाव का प्रतिबंध है।

4. सशक्त लोकतंत्र: संविधान ने भारत को सशक्त लोकतंत्र के रूप में प्रदर्शित किया है। यह प्रत्येक नागरिक को सरकार में सहभागिता का अधिकार प्रदान करता है और लोकतंत्र के सिद्धांतों को प्रमोट करता है।

5. धार्मिक आदर्श: संविधान ने सभी धर्मों के प्रति समान समर्पण और सम्मान की भावना को प्रोत्साहित किया है। धार्मिक स्वतंत्रता के सिद्धांत के अनुसार, व्यक्तिगत धार्मिक मामलों में सरकार का हस्तक्षेप प्रतिबंधित है।

6. संविधानीय संविधान: संविधान ने खुद को संविधानीय दृष्टि से सबसे उच्च मानक के रूप में प्रस्तुत किया है। इसे संविधान ने संविधान से बचाने के लिए स्वतंत्र न्यायपालिका द्वारा संविधानीय मामलों में मानक के रूप में प्रस्तुत किया है।

भारतीय संविधान की यह प्रमुख विशेषताएं हैं जो देश को एक सामाजिक, न्यायपूर्ण, समान और विकासशील समाज की दिशा में अग्रसर करने में मदद करती हैं। यह संविधान देश के नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा और समर्पण की भावना को बढ़ावा देता है और उनकी सामाजिक और आर्थिक समृद्धि को सुनिश्चित करने के लिए एक मानदंड प्रदान करता है।

प्रश्न-2. भारत की विदेश नीति के प्रमुख तत्त्व क्या थे? वर्णन कीजिए ?

उत्तर:-भारत की विदेश नीति उसके राष्ट्रीय हित की रक्षा और सुरक्षा को प्राथमिकता देने के साथ-साथ उसकी सहयोगी भूमिका को प्रमोट करने का उद्देश्य रखती है। इसमें कई महत्वपूर्ण तत्त्व शामिल होते हैं, जो भारत के विदेश नीति के मूलभूत सिद्धांत हैं।

1. शांति और सुरक्षा: भारत की प्रमुख विदेश नीति शांति और सुरक्षा की दिशा में होती है। यह उद्देश्य देश के आत्मरक्षण और उसके सूचना संरक्षण की प्रमुखता को दर्शाता है। भारत आतंकवाद, साइबर खतरे और आंतरराष्ट्रीय आपत्तियों के खिलाफ सामर्थ्यपूर्ण कदम उठाता है।

2. सहयोग और आत्मनिर्भरता: भारत अपने विदेश नीति में सहयोग और आत्मनिर्भरता की महत्वपूर्णता को समझता है। यह अपने विकास के प्रोत्साहन के लिए विदेशी निवेश को आकर्षित करता है और विभिन्न देशों के साथ व्यापार, विज्ञान और प्रौद्योगिकी में सहयोग करता है।

3. प्राथमिकता और प्रभाव: भारत की विदेश नीति में विकास और प्राथमिकता का संरक्षण भी शामिल होता है। भारत अपने विकास के लिए प्रभावी कदम उठाने के साथ-साथ दुनिया के गरीब और पिछड़े देशों के प्रति अपनी सामर्थ्या का उपयोग करता है।

4. विश्वास और सामंजस्यता: भारत की विदेश नीति विश्वास और सामंजस्यता की दिशा में भी काम करती है। भारत विभिन्न आंतरराष्ट्रीय संगठनों में भाग लेता है और अंतरराष्ट्रीय मामलों में सहयोगपूर्ण भूमिका निभाता है।

5. पर्याप्त विकास: भारत की विदेश नीति का उद्देश्य यह भी होता है कि वह देश के सामाजिक और आर्थिक विकास को पर्याप्त रूप से प्रोत्साहित कर सके। भारत विकास के साथ-साथ दुनिया में महत्वपूर्ण रोल निभाने का प्रयास करता है और सभी देशों के साथ मित्रता और सहयोग का आदर करता है।

भारतीय विदेश नीति उपराष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन द्वारा “सर्वोपरि सत्य का अनुसरण करने का संकल्प” के साथ प्रकट की गई है। यह देश की महत्वपूर्णताओं को समझकर उसकी विदेश नीति को निर्धारित करने की कोशिश करती है ताकि विश्व में एक सशक्त और सहयोगी भारत की भूमिका मजबूत हो सके।

प्रश्न-3. स्वतंत्रता के बाद भारत में संचार के साधनों में विकास का वर्णन कीजिए ?

उत्तर:- स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भारत में संचार के साधनों में विकास ने देश के संचार प्रणाली में महत्वपूर्ण परिवर्तन लाया है। इस विकास के साथ, नए और तकनीकी उपकरण तथा सेवाएं विकसित हो रही हैं, जो सामान्य जनता के बीच संचार को सुगम और अधिक उपलब्ध बना दिया है।

पहले दौर में, भारत में संचार का मुख्य साधन टेलीफोन था, जो सरकारी सेवा के रूप में होती थी और उसकी उपलब्धता सीमित थी। लेकिन स्वतंत्रता के बाद टेलीकॉम्युनिकेशन में नए और प्रौद्योगिकीकृत बदलाव हुआ। 1980 के दशक में प्राइवेट कंपनियों के प्रवेश के साथ, मोबाइल फोन के आगमन ने लोगों की संचार की सीमाएं खोल दी। यह साधन लोगों को किसी भी समय और किसी भी स्थान से दुनिया के साथ जुड़ने का अवसर प्रदान करता है।

इंटरनेट के आगमन के साथ, संचार के क्षेत्र में और भी विशाल उन्नतियाँ हुईं। यह नए विकासों की दिशा में देश को आगे बढ़ने में मदद कर रहा है। इंटरनेट ने लोगों को जानकारी की मुक्त और तेज़ उपलब्धता प्रदान की है, जिससे वे अब विश्वभर की खबरें, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, शिक्षा, साहित्य आदि से अपडेट रह सकते हैं।

सोशल मीडिया का प्रवेश संचार के क्षेत्र में एक नये युग का संकेत है। लोग अब सोशल मीडिया के माध्यम से अपने दोस्तों, परिवार और दुनिया के साथ जुड़ सकते हैं, विचारों को साझा कर सकते हैं और समाज में विचारबद्धता पैदा कर सकते हैं।

इसके साथ ही, सूचना सुरक्षा और गोपनीयता को भी महत्व दिया जा रहा है। नए तकनीकी संचार के साधनों के साथ-साथ उनकी सुरक्षा भी सुनिश्चित की जा रही है, ताकि किसी भी प्रकार की दुर्घटना या खतरे की स्थिति से बचा जा सके।

समर्थन में कह सकते हैं कि स्वतंत्रता के बाद भारत में संचार के साधनों के विकास ने लोगों के जीवन को सुगम, तेज़ और व्यापक बना दिया है। इसके प्रभाव से देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया जा रहा है, और भारत अब एक ग्लोबल स्तर पर भी आगे बढ़ रहा है।

प्रश्न-4. स्वतंत्र भारत में महिला सशक्तिकरण के लिए किये गये प्रयासों का वर्णन कीजिए ?

उत्तर:- स्वतंत्र भारत में महिला सशक्तिकरण के लिए विभिन्न प्रयासों ने महिलाओं के समाज में स्थान को मजबूती देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इन प्रयासों ने महिलाओं के अधिकारों की सुरक्षा, उनकी शिक्षा और रोजगार के अवसरों को बढ़ावा देने का माध्यम प्रदान किया है।

1. महिला शिक्षा: स्वतंत्रता के बाद से ही महिला शिक्षा को महत्वपूर्णता मिली। सरकार ने महिलाओं की शिक्षा को प्राथमिकता देने के लिए विभिन्न योजनाएं शुरू की हैं, जिनमें ‘सर्व शिक्षा अभियान’ और ‘बेती बचाओ, बेती पढ़ाओ’ जैसी महत्वपूर्ण पहलवार हैं।

2. महिला सशक्तिकरण के संरक्षण: स्वतंत्रता के बाद से, महिला सशक्तिकरण के संरक्षण के लिए कई कानूनी प्रावधान बनाए गए हैं। यहाँ तक कि विरोधी विशेषण याचिकाएं, महिलाओं के खिलाफ भ्रष्टाचार और उत्पीड़न के मामलों को त्वरित सुनवाई के लिए महिला कोर्टें स्थापित की गई हैं।

3. आर्थिक सशक्तिकरण: स्वतंत्रता के बाद से महिलाओं के लिए आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में कई कदम उठाए गए हैं। उन्हें विभिन्न क्षेत्रों में विशिष्ट प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है ताकि वे स्वयं का आर्थिक सामर्थ्य बना सकें।

4. रोजगार अवसर: स्वतंत्रता के बाद से, सरकार ने महिलाओं के लिए रोजगार के नए अवसर प्रदान किए हैं। विभिन्न सेक्टरों में महिलाओं के लिए सरकारी योजनाएं और उद्यमिता की शिक्षा से उन्हें रोजगार के क्षेत्र में सही मार्गदर्शन मिलता है।

5. महिला स्वास्थ्य और आरोग्य: स्वतंत्रता के बाद, महिलाओं के स्वास्थ्य की देखभाल में भी सुधार किए गए हैं। उन्हें प्रेग्नेंसी और मातृत्व संबंधित सेवाएं सुनिश्चित करने के लिए कई योजनाएं प्रदान की जा रही हैं।

6. महिला आत्मरक्षा और सुरक्षा: स्वतंत्रता के बाद, महिलाओं की आत्मरक्षा और सुरक्षा के लिए भी कई योजनाएं शुरू की गई हैं। ‘निर्भया योजना’ जैसी योजनाएं महिलाओं की सुरक्षा को मजबूती प्रदान करने का लक्ष्य रखती हैं।

इन प्रयासों से स्वतंत्र भारत में महिला सशक्तिकरण की प्रक्रिया में सुधार हुआ है और महिलाएं अब अपने अधिकारों के प्रति सक्षम हो रही हैं।

प्रश्न-5.

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प्रश्न-6.

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प्रश्न-7.

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प्रश्न-8.

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प्रश्न-9.

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प्रश्न-10.

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